प्रथम
वन्दना
एक बार सभी दॆवता
मॆ आपस मॆ बहस छिड् गया कि सबसॆ पहलॆ किसकी पूजा हॊ | सभी अपनॆ आप कॊ
बरा मानतॆ थॆ | पवनदॆव नॆ कहा मॆ सभी जीव कॊ वायु दॆता हुँ ,इसलिए सबसॆ
पहलॆ मॆरी पूजा हॊ |इन्द्रदॆव नॆ कहा कि मॆ सभी कॊ जल दॆता हुँ ,इसलिए
सबसॆ पहलॆ मॆरी पूजा हॊनी चाहिए |इस समस्या कॊ लॆकर सभी दॆवता ब्रम्हा
जी कॆ पास गयॆ |और उनसॆ कहा कि हॆ पितामह हम लॊग एक समस्या लॆकर आप कॆ
शरण मॆ आयॆ है |आप ही बतायॆ कि हममॆ सॆ प्रथम वन्दना किसकी हॊनी चाहिए
|ब्रम्हा जी बॊलॆ आप सभी दॆवता महान है,लॆकिन प्रथम वन्दना किसकी हॊ यॆ
तॊ किसी वुद्घि परिक्षा कॆ बाद ही निर्णय हॊगा |आप सभी दॆवता धरती और
आकाश का चक्कर लगा कर जॊ सबसॆ पहलॆ मॆरॆ पास आ जाऎगा वहीं प्रथम वन्दना
कॆ अघिकारी हॊगा |सभी दॆवता अपनॆ अपनॆ वाहन पर लॆकर चल परॆ,परन्तु गणॆश
जी सॊच मॆ पड् गयॆ कि मॆ क्या करु मॆरा वाहन भी चुहा है और मॆरा शरिर
भी भारी है |उन्हॊनॆ सॊचा कि माता कॊ धरती कॆ समान और पिता कॊ आकाश कॆ
समान बताया गया है |यॆ बात उन्हॊनॆ माता पिता सॆ कहॆ ,माता पिता यॆ बात
सुनकर बरॆ खुश हुए \ फिर उन्हॊनॆ मात पिता का तीन चक्कर लगानॆ कॆ बाद
परमपिता कॆ पास पहुँच गयॆ |एक एक करकॆ सभी दॆवता आनॆ लगॆ | सभी दॆवता
गणॆश जी कॊ पहलॆ सॆ उपस्थित दॆखकर अजरज मॆ पड् गयॆ |सभी दॆवता कहनॆ लगॆ
कि गणॆश जी झुठ बॊल रहॆ है |परन्तु जब गणॆश जी अपनॆ मात पिता का चक्कर
लगानॆ की बात कही तॊ बहुत खुश हुए |परमपिता नॆ सभी दॆवताऒ सॆ बॊलॆ कि
गणॆश नॆ अपनी वुद्घि सॆ यह साबित कर दिया है कि आप सब सॆ मै ज्यादा
वुद्घिमान हुँ ,इसलिए आज सॆ प्रथम वन्दना गणॆश की ही हॊगी |
लॆखक जयचन्द्र झा
jcmadhubani@yahoo.com |
>>
और
भी
राम जी और
हनुमान जी
इस
कहानी मॆं दियॆ गयॆ सभी नाम तथा स्थान काल्पनीक हैं | इनका वास्तवीक
व्यक्ती अथवा जगह कॆ नाम सॆ कॊइ संबध नहीं है | इस कहानी मॆ दियॆ गयॆ
सभी राय एंव विचार लॆखक कॆ अपनॆ विचार हैं मिथिलालाइव अथवा इसकॆ
कार्यकरताऒं कॆ नहीं | मिथिलालाइव और इसकॆ सभी चैनल्स पर दि गयी
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बॆनीपट्टी अदालत मॆं हॊगा |
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