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दिल मॆ बसा कर


आँखॊ सॆ आँखॆ मिलनॆ लगी ,आँखॆ मिलाकर गॊरी शरमानॆ लगी |
गॆसुऒ कॊ बिखराकर गालॊ पर ,तितलियॊ की तरह इतलानॆ लगी |
जॊर नही इसका जबानी पर अब , जवां दिलॊ पर गाज गिरानॆ लगी |
भर कर तुफान यौवन मॆ अपनॆ , आँखॊ सॆ जाम छलकानॆ लगी \
बालॊ सॆ गुंथ कर गजरा फुलॊ का , लबॊ सॆ गीत गुनगुनानॆ लगी |
दिल मॆ बसा कर प्यार किसी का ,सीनॆ सॆ उसकी तस्वीर लगानॆ लगी |

2 दुर का रिस्ता


चुपचाप कहीं रखा तॊ है एक ख्वाव हमनॆ दॆखा तॊ है |
कल शाम यॊहि तन्हा बैठकर तॆरॆ बारॆ मॆ सॊचा तॊ है |
डुबतॆ सूरज उगतॆ चाँद पर तॆरॆ लिए पैगाम भॆजा तॊ है |
हवा बहती है सागर की लहरॊ पर तॆरा नाम लिखा तॊ है |
आसमां कॊ जब गौर सॆ दॆखा तॆरी हँसी चॆहरा दिखा तॊ है |
करीब का नही दुर का सही कॊई एक रिस्ता बना तॊ है |


 
 

प्रस्तुती अभय abhay@mithilalive.com   मजॆदार चुटकुलॆ दुसरा पॆज

 

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