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ऐसी खबर तो लालू-श्रीमती सरकार
के राज में सामने आती थीं। अब अंतरराष्ट्रीय बिहार से भी आने लगीं।
सुशासन के राष्ट्रीय बिहार के बारे में पटना हाई कोर्ट ने कहा है कि
बिहार में सत्ता नाम की कोई चीज ही नहीं है। अब यहां पर नीतीश कुमार की
सुशासनी सरकार एक समिति बना सकती है कि सत्ता की परिभाषा क्या है। चूंकि
हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि पिछले 25 वर्षों से छात्र अपने रिजल्ट के
लिए दौड़ रहे हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कभी जांच के नाम पर, कभी
कुछ और के नाम पर उनके साथ खिलवाड़ कर रहा है।
अब यह 25 वर्ष से चल रहा है। लालू-श्रीमती सरकार-कांग्रेस सब 25 वर्ष में
शामिल रहे हैं। इसलिए इसमें सुशासन सरकार की सत्ता का क्या दोष। अभी अभी
सुशासन सरकार को मारिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने सत्ता का
अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र भी दिया है। फिर भी सत्ता की व्याख्या तो की ही
जा सकती है।
यूं बहुत पहले पितामह मार्क्स ने सत्ता की परिभाषा करते हुए कहा था कि
जिस दिन राज्य समाप्त हो जाएगा, वही असली सत्ता होगी। मार्क्स का यह सपना
बिहार न जाने कब से पूरा कर रहा है। बिहार में राज्य समाप्त हो चुका है–सिर्फ
राजा नीतीश कुमार बचे हैं।
यह भी खबर आई है कि बिहार के भिखारी बिहार सरकार से ज्यादा बेहतर ढंग से
अपना काम काज करते हैं। सुशासन सरकार के बनने के बाद ही बिहार के भिखारियों
ने 2006 में ही भिखमंगा समाज बना लिया था। यह समाज बिहार सरकार से प्रेरणा
ले कर भिखारियों का तबादला–पोस्टिंग और राष्ट्रीय दौरा तक करवाता है। इस
समाज के अध्यक्ष भी अति पिछड़ा वर्ग के हैं– राधे सहनी। इनकी कमाई बिहार
के दैनिक वेतन भोगी मजदूरों से भी ज्यादा है। बिहार में दैनिक वेतन भोगी
को 81 रूपए रोज मिलता है। जबकि भिखारी डेढ़–दो सौ रुपए रोज कमाता है।
आशा की जा रही है कि बिहार सरकार को जब केंद्र सरकार से बिजली की भीख
मांगने से फुरसत मिल जाएगी तो वह भिखारी कल्याण आयोग का गठन कर ही लेगी।
बिहार में जो छात्र पढ़ते हैं, उनका मानना है कि परीक्षा में नकल करना उनका
अंतरराष्ट्रीय अधिकार है। उनके माता–पिता मानते हैं कि यह उनका जन्मसिद्ध
अधिकार भी है। वह भी इसी राह पर चले थे। बिहार में परीक्षा चोरी को बड़ा
ही सम्मानजनक नाम दिया गया है– कदाचार। लगता है यह भ्रष्टाचार का कोई सगा
संबंधी है। यह भी माना जाता है कि अच्छा कदाचारी अच्छा भ्रष्टाचारी भी
होता है।
भ्रष्टाचार बिहार में अंतरराष्ट्रीय उद्योग भी है। अच्छा कदाचारी वही माना
जाता है जो नकल कर ले और किसी को पता भी न चले। अच्छे भ्रष्टाचारी की भी
यही पहचान होती है। बिहार की सुशासनी सरकार ने इसे रोकने की कोशिश कर
छात्रों को आंदोलन करने पर मजबूर कर दिया है। बिहार के कदाचारी छात्र
बिहार की जाति व्यवस्था से परे हैं। वह सर्वजातीय हैं। आशा है बिहार
सरकार कोई समिति गठित कर कदाचार संबंधी नियम बनाएगी ताकि छात्रों को
कदाचार में किसी प्रकार की परेशानी न हो और लाठी-गोली चलाने में सरकार का
समय बरबाद न हो |
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