मिथिलालाइव
साहित्य
 
MithilaLive >Sahitya >>व्यंग्य
 भॊनू झा कॆ साथ मस्ती ( Jay Chandra Jha, Introduces Bhonu Jha & Phudaan Jha)

* एक डॉक्टर, वकील और गणितज्ञ के बीच प्रेमिका और पत्नी को लेकर बहस हो रही थी। वकील ने कहा- मेरे हिसाब से प्रेमिका बेहतर है, क्योंकि पत्नी के साथ तलाक़ लेना बहुत लंबी और ख़र्चीली प्रक्रिया होती है। डॉक्टर बोला- पत्नी का साथ अच्छा है, क्योंकि इससे आपके जीवन में सुकून आता है। गणितज्ञ बोला- तुम दोनों ही ग़लत हो। पत्नी और प्रेमिका, दोनों का होना फ़ायदेमंद है। आप नज़र न आएं, तो पत्नी सोचती है की प्रेमिका के पास होंगे और प्रेमिका सोचती है कि पत्नी के साथ होंगे। इस बीच आपको जो व़क्त मिलता है, उसमें आप गणित के सवाल हल कर सकते हैं।

* भॊनू झा की वाइफ बड़ी जलनखोर और शक्की मिज़ाज़ की थी। एक दिन वह पति के कोट पर लंबे बाल ढूंढ़ने लगी। जब उसे बाल नहीं मिले, तो कहने लगी- अच्छा,तो तुम आजकल किसी गंजी औरत से इश्क़ फरमा रहे हो। अगले दिन वह पति के कपड़ों में महिलाओं के परफ्यूम की ख़ुशबू सूंघने लगी, पर ऐसी कोई ख़ुशबू उसे मिली नहीं। उसने हाथ नचाते हुए कहा-‍
अच्छा, तो वह गंजी औरत इतनी कंजूस है कि एक परफ्यूम भी नहीं ख़रीद सकती!

* एक मर्तबा भॊनू झा पीसीओ पर फोन करने गए। वहां जाते ही उन्होंने आव देखा न ताव, पीसीओ संचालक फुदन झा को दो थप्पड़ जड़ दिए। फुदन झा ने रुआंसे होते हुए पूछा- आख़िर मैंने कौन-सी ग़लती कर दी? भॊनू झा ने मासूमियत से जवाब दिया- भाई, इसमें मेरी भी कोई ग़लती नहीं। आपने ही यह सूचना लगा रखी है, ‘डायल करने से पहले 2 लगाएं’।

* भॊनू झा को सड़क पर कोई वस्तु पड़ी दिखी। चूंकि वह विज्ञान का विद्यार्थी था, इसलिए उसने विज्ञान के सिद्धांत के अनुसार पहले देखकर, फिर छूकर, फिर सूंघकर यह पता लगाने की कोशिश की कि आख़िर वह क्या है। जब समझ में नहीं आया, तो उसने चखकर देखा। चखने पर उसे मालूम पड़ा कि यह तो गोबर है। भॊनू झा ने राहत की सांस लेते हुए कहा- अच्छा हुआ कि इस पर मेरा पैर नहीं पड़ा।




 
मित्र को भेजियेँ  सुझाव/प्रतिक्रिया  प्रस्तुती जय चन्द्र झा jcmadhubani@yahoo.com

 

Feed Back  -   Refer To Friend - Terms Of Use- Privacy Policy About Us  -  Contact Us  - Careers -Advertise With Us
© 2007 Adarsh Internet Pvt. Ltd. Benipatti Madhubani All Right Reserved info@mithilalive.com