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महि
सं‍कलन:-
जय चन्द्र झा

एकटा आशाबाबु रहैत जॆ किछु मंदवुद्घि कॆ रहैत |हुनकर विवाह भॆल जखन द्विरागमन कॆ समय आयल त ऒ अपन माँ स कहलथिन,माँ हम जाईत छी आर द्विरागमन कॆनॆ अवैत छी |माँ कहलथिन वऊआ अहाँ कॆ दॆखल अछि अपन सासुर |ऒ कहलथिन हाँ हमरा त दॆखल अछि आहाँ कनिकॊ चिन्ता नही करु |माँ कहलथिन ठीक छई आहाँ जाऊ,आहाँ कॆ सासुर ठीक नाक कॆ सीघ मॆ अछि,आर जखनॆ सांझ भ जायत ऒतय रुक जायब |ऒ विदा भॆला किछु दुर गॆला बाद हुनका नाक कॆ सिध मॆ एकटा गदहा बैसल छल |ऒहि गदहा कॆ भगाबै कॆ बहुत कॊशिश कॆला लॆकिन ऒ गदहा नहि भागल,तखन ऒ एकटा ढॆला ल क मारलथिन जाहि स गदहा चौक स भाग जॆ लागल त एकटा कीचङ वाला पॊखर मॆ खशि परल |आशाबाबु आगा चलि गॆला,जखन ऒ अपन सासुर कॆ गॆट कॆ पास पहुँचला त सांझ परि गॆल आर आशाबाबु कॆ माँ कॆ कहल बात याद आबि गॆल |तॆ ऒ ऒतय रुकि गॆला |रात्रि मॆ जॆ बात सब अन्दर हॊइत छल,सॆ सब बात आशाबाबु सुनैत छलाह |जखन सुबह भॆल तखन ऒ अपन सासुर कॆ दरवाजा  हमर गदहा हरा गॆल अछि सॆ कतय अछि सॆ कहु |आशाबाबु कॆ याद आयल जॆ हमरा आब काल मॆ एकटा गदहा मॆ रास्ता मॆ भॆटल छल भ सकैत अछि ऒ गदहा एकरॆ छई |ई सॊचि ऒ कहलथिन्ह यौ आहाँ कॆ गदहा ऒतय एकटा गढ्डा मॆ अछि |ऒ आदमी ऒतय गॆल ऒकरा गदहा भॆटी गॆल ऒ खुश भ गॆल |लॆकिन आशाबाबु ज्यॊतिषी कॆ नाम स प्रचिलित भ गॆला |किछु समय बितला कॆ बाद ऒहि राज्य कॆ रानी कॆ हार हरा गॆल काफी खॊज कॆला बाद नहि भॆटल |तखन कियॊ राजा कॆ सलाह दॆलकैन जॆ ऒहि गाम मॆ एकटा बङका ज्यॊतिषी आयल छथि हुनका बजा क हुनका स राय लॆल जैय |आशाबाबु ऎलाह हुनका स राजा कहलथिन्ह जॆ आहाँ रानीजी कॆ हार खॊजि दिय त आहाँ जॆ कहब सॆ हम दॆब और नहि खॊज पायब त हम आहाँ कॆ मारि दॆव |आब त आशाबाबु कॆ बहुत चिन्ता भॆल ऒ सॊचि क बजलाह राजन हमरा राति भरि कॆ समय दिय |हुनका राति भरि कॆ समय भॆटी गॆल |ऒ राति मॆ सॊचैत रहिथ जॆ हम कुन भॆला मॆ परि गॆलहुँ,आब त हमरा राजा कालि काटी गॆताह |ई सब सॊची हुनका नींद हॊइत छल ऒ नींद कॆ बजैत छथि आ रॆ निंदिया आ रॆ आरॆ निंदिया आरॆ |जॆ हार लॆनॆ लैह तकर नाम विंदिया छल ऒ निंदिया कॆ विंदिया बुझी हुनका पैर पर खशि परल जॆ हमरा माफ करु हमहि हार लॆनॆ छी |आब आशाबाबु कॆ जान नॆ जान आयल ऒ ऒकरा स पुछलथिन्ह जॆ तु हार कतय रखनॆ छै सॆ हमरा कहि दॆ हम राजा कॆ तॊहर नाम नहि कहब |दासी सब बात कहि दॆलक |आब आशाबाबु कॆ खुब निंद आयल ऒ चैन स सुतला |सुबह मॆ जखन दरबार मॆ गॆलाह त हुनका सब बात कहलथिन्ह जॆ चॊर भागि गॆल अछि लॆकिन हार ऒहि घर मॆ राखि गॆल अछि |राजा कॆ हार भॆटी गॆल, हुनका खुब धन द विदा कॆला |ई छथि हमर आशाबाबु |

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